इंदौर से
महेश्वर 95km की दूरी पर है। यहां पूरा दिन बिताने की बहुत ही अच्छी जगह है।
महेश्वर में
अहिल्याबाई का किला मुख्य आकर्षण का केंद्र है। महेश्वर की महेश्वरी साड़ियां विश्व प्रसिद्ध है। महेश्वर इंदौर से नजदीक होने के कारण 1 दिन के family picnic के लिए बहुत बढ़िया जगह है।
Maheshwar Fort अहिल्याबाई होलकर की नगरी
महेश्वर का इतिहास
महेश्वर का इतिहास 2500 साल पुराना है।
महेश्वर शहर को
माहिष्मती नाम से भी जाना जाता है।
महेश्वर का रामायण और
महाभारत में उल्लेख मिलता है। पुराणों के अनुसार महेश्वर हैहवंशीय राजा सहस्त्रार्जुन की राजधानी थी, जिसने रावण को पराजित किया था। कालांतर के बाद यह शहर
होलकर वंश की महारानी देवी अहिल्याबाई होलकर की राजधानी रहा है। यह शहर आजादी के पहले मराठा शासक होलकर का राज्य
इंदौर की राजधानी रहा है।
नर्मदा नदी के तट पर बने हुए सुंदर घाट
देवी अहिल्याबाई के कालखंड में बने हुए हैं। इस प्राचीन शहर का नाम भगवान शिव के
महेश्वर नाम पर पड़ा हुआ है।
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| Ahilya Fort |
Maheshwar Fort अहिल्याबाई होलकर की नगरी
नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर बसा
महेश्वर शहर अद्भुत ऐतिहासिक सांस्कृतिक कला का संगम है।
महेश्वर में
अहिल्या बाई का किला देख कर हम आश्चर्यचकित रह गए , इसे
अहिल्या फोर्ट कहा जाता है। इस की स्थापत्य कला बहुत अद्भुत, बेमीसाल, अद्वीतीय है।
नर्मदा नदी के घाट पर बहुत सारे शिव जी के गणेश जी के मंदिर है।
जैसे कालेश्वर, राजराजेश्वर,अहीलेश्वर, विठ्ठलेश्वर मंदिर है।
नर्मदा नदी में घाट का बहुत सुंदर प्रतिबिंब दिखता है।
नर्मदा नदी को बहुत पवित्र नदी माना जाता है। इस घाट पर बहुत सारे लोग नदी में स्नान करते हुए दिख जाएंगे, यहां हर
पूर्णिमा में
नर्मदा स्नान का विशेष महत्व है। यहां बोटिंग का मजा भी लिया जा सकता है।
महेश्वर पहुंचने के बाद हम सबसे पहले क़िला देखने गए। नर्मदा नदी के घाट से लग कर ही क़िले की सीढ़ियां है। सीढिओ से ऊपर जाते हुए किले के बाहर छोटे छोटे जालीदार खिड़कियां-झरोखे बहुत ही सुंदर है। इस खिड़कियों में बैठ कर पर्यटक फोटो खींचते हैं। हमने भी खूब फोटो निकालें।
Maheshwar Fort अहिल्याबाई होलकर की नगरी
फिर हम मुख्य प्रवेश द्वार से क़िले के अंदर गए। किले का दक्षिण मुखी मुख्य प्रवेश द्वार
नर्मदा नदी की ओर खुलता है। मुख्य किले के अंदर
अहीलेश्वर मंदिर सर्वाधिक दर्शनीय है। इस मंदिर में राम जानकी मंदिर है। इस मंदिर की स्थापत्य कला लाजवाब है। इस मंदिर के सामने
राजराजेश्वर मंदिर है। यह मंदिर छत्री के आकार का बना हुआ है।
किले के अंदर ऊपर जाने वाली सीढ़ियां है, यहां से उपर जाते हुए
सहस्त्रार्जुन मंदिर है।
सहस्त्रार्जुन मंदिर का पुनर्निर्माण देवी अहिल्या ने करवाया था। इस मंदिर में भगवान
सहस्त्रार्जुन के मूर्ति के साथ शिव लिंग स्थापित किया गया है। इस मंदिर की खासियत है की यहां 11 दिये हमेशा जलते रहते हैं, पर कब से जल रहे हैं किसी को मालूम नहीं है। यह सुनकर हमें भी आश्चर्य हुआ। परिसर में राम जानकी, सूर्य,
शिवजी के मंदिर है। यहां आने के बाद आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।
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| Sahastrarjun mandir |
Maheshwar Fort अहिल्याबाई होलकर की नगरी
मंदिर के दर्शन करने के बाद हम आगे बढ़ने लगे। ऊपर जाते हूए पत्थरों से बने हुए सीढ़ी नुमा रास्ते में चलने लगे। यह रास्ता देवी
अहिल्या की राजगादी की और जाता है। यह दो मंजिला भवन है , यहां अहिल्याबाई रहती थी। अब यहां नीचे के भवन में पर्यटको के लिए
म्यूजियम बना हुआ है।
म्यूजियम मे तलवार,भाले
,पगड़ी आदि को देखा जा सकता है। यहां सफेद गद्दी पर
अहिल्याबाई की फोटो रखी हुई है। इसी स्थान पर
अहिल्याबाई की राजकीय बैठक थी। भवन के बाहर देवी
अहिल्या बाई की पालकी रखी हुई हैं।
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| Ahilyabai ki Palkhi |
रानी अहिल्याबाई शिव भक्त थी। उनके राज गादी के समीप ही उनका पूजन कक्ष है। इस पूजन कक्ष में छोटे से लेकर बड़े तक शिव लिंग दिखाई देंगे। यहां स्वर्ण झूलेमे राधा कृष्ण की प्रतिमा है। इस पूजन कक्ष में जाना मना है। बाहर से जाली लगी है उसी में से हम यह दृश्य देख सकते हैं। इस राज गादी भवन परिसर में आजू बाजू बहुत हरियाली है इसी के प्रांगण में
देवी अहिल्या बाई की बहुत बड़ी मूर्ति स्थापित की हुई हैं।यह मूर्ति धातु से बनी हुई है।हाथ में शिवलिंग लेके खड़ी अत्यंत साधारण वेशभूषा में यह मूर्ति का स्वरूप बहुत ही सौम्य है।
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| Ahilyabai Holkar ki badi murti |
Maheshwar Fort अहिल्याबाई होलकर की नगरी
इस तरह हमारा यहां तक का सफर बहुत अच्छा रहा,
महेश्वर tour के लेख के भाग 2 में
देवी अहिल्याबाई के बारे में बताऊंगी। इसी तरह मेरा लेख पढ़ते रहिए और
ट्रैवल करते रहिए। धन्यवाद।