Travelling-South India tour-Dhanushkodi
Day 2
Visiting time-6am to 6pm
Hi......Travelling-South India tour-Dhanushkodi इस blog में Dhanushkodi के traveling के बारे में जानकारी दूगी।
रामेश्वरम में हम 1: 00 बजे पहुंचे थे।रामेश्वरम में हम Hotel Vinayaga में रूके थे।Hotel Vinayagaयह Hotel Poppys की ही शाखा है। Hotel में लंच में North Indian खानेसे लेकर South Indian थाली भी मिलती है। हम ने south Indian थाली मंगवाई थी।
यहां भगवान श्री राम से संबंधित कई मंदिर हैं।
धनुषकोडी यह रामेश्वर द्विप के दक्षिण तट पर बसा हुआ गांव है। धनुष्कोडी से श्रीलंका तकरीबन 18 मील पश्चिम में है। रामेश्वरम से धनुषकोडी आधे घंटे का रास्ता है।Madurai से हम सुबह breakfast करके 9बजे रामेश्वरम के लिए निकले। मदुरै से रामेश्वरम की दूरी 3.30 -4 घंटे की है।
रामेश्वरम एक द्वीप है। यहां रेल मार्ग और सड़क मार्ग है जो कि समुंदर से होकर गुजरता है। पंबन सेतु रामेश्वरम को भारत के मुख्य भूमि से जोड़ता है, पंबन सेतु रेल मार्ग है। यह भारत का पहला सी-ब्रिज है। यह 2 किलोमीटर में फैला हुआ है। यह करीब करीब सौ साल पुराना सेतु है। इस ब्रिज से समांतर रोड ब्रिज बनाया गया है। यह ब्रिज समुंदर में बना अपने आप में एक अनोखा ब्रिज है। इस ब्रिज से जाते वक्त यात्री समुंदर का अद्भुत नजारा देख सकते हैं। यहां यात्री रुक कर फोटोस लेते हैं और समुंदर का मजा लेते है। यहां फिल्म Chennai Express के एक गाने की शूटिंग हुई है।
रामेश्वरम में हम 1: 00 बजे पहुंचे थे।रामेश्वरम में हम Hotel Vinayaga में रूके थे।Hotel Vinayagaयह Hotel Poppys की ही शाखा है। Hotel में लंच में North Indian खानेसे लेकर South Indian थाली भी मिलती है। हम ने south Indian थाली मंगवाई थी।
रामेश्वरम से धनुषकोडी 20 मिनट का रास्ता है। हम लोग लंच के बाद धनुषकोडी के लिए निकले।धनुषकोडी भारत का आखरी छोर हैैैै।
धनुषकोडी
धनुषकोडी यह बेट है। धनुषकोडी यह भारतीय महासागर और बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है। यहां भारतीय महासागर उछलता हुआ और बंगाल की खाड़ी शांत प्रतीत होती है। यहां इन दोनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
धनुषकोडी कैसे पहुंचे
रामेश्वरम से धनुषकोडी के लिए लोकल ऑटो जीप चलती है।
धनुषकोडी कोड़ी का इतिहास
धनुषकोडी से भगवान श्रीराम ने लंका जाने के लिए वानरों के साथ मिलकर सेतु बनाया था। यहीं से श्री राम माता सीता को लाने लंका गए थे। लौट के आने के बाद रावण के भाई विभीषण ने भगवान श्री राम को सेतु तोड़ने के लिए कहा था और श्रीराम ने एक बाण से सेतु तोड़ दिया था। इसलिए इस जगह को धनुषकोडी यह नाम दिया गया है। इस सेतु के अवशेष आज भी समुंदर में दिखते है।
1964 में धनुषकोडी में सुनामी आया था। सुनामी में यह गांव तबाह हो गया। सुनामी के पहले यह गांव उभरता हुआ टूरिस्ट स्पॉट था। अब यह खंडहर में तब्दील हो गया है। यहां सूर्यास्त के बाद कोई रुकता नहीं है।सूर्यास्त होते ही यहां सुनसान हो जाता है।यहां भगवान श्री राम से संबंधित कई मंदिर हैं।
यहां के जल को बहुत पवित्र माना जाता है। इस पवित्र जल में लोग स्नान करते हैं। कहा जाता है कि धनुषकोडी में स्नान करने से यात्रा सफल हो जाती है। यहां का दृश्य अतिशय अद्भुत प्रतीत होता है।
आपको मेरा लेख कैसा लगा ? Please comment करें और share करे











No comments:
Post a Comment